-:ABOUT THE BOOK:-
"আমার প্রিয় দেশবাসী, আমি আপনাদের সকলকে একটি উদ্বেগজনক ও গুরুতর চ্যালেঞ্জ সম্পর্কে সতর্ক করতে চাই। ভারতের বিরুদ্ধে দীর্ঘদিন ধরে একটি সুচিন্তিত ষড়যন্ত্র চলছে, যার লক্ষ্য ভারতের জনসংখ্যাগত ভারসাম্য পরিবর্তন করা।
এই অবৈধ অনুপ্রবেশকারীরা আমাদের দেশের যুবকদের কর্মসংস্থানের সুযোগ ছিনিয়ে নিচ্ছে। এই ধরনের মানুষরা আমাদের দেশের বোন ও কন্যাদের লক্ষ্যবস্তু করছে। তারা নিরীহ আদিবাসীদের বিভ্রান্ত করে তাদের জমি দখল করছে। দেশ এটি সহ্য করবে না।
যখন জনসংখ্যাগত পরিবর্তন ঘটে, বিশেষ করে সীমান্তবর্তী এলাকায়, তখন জাতীয় নিরাপত্তা হুমকির মুখে পড়ে। দেশের ঐক্য, অখণ্ডতা এবং উন্নয়ন বাধাগ্রস্ত হয়। এটি সামাজিক অশান্তির বীজ বপন করে। পৃথিবীর কোনও দেশই অবৈধ অনুপ্রবেশকারীদের কাছে আত্মসমর্পণ করে না। তাহলে আমরা কীভাবে ভারতকে আত্মসমর্পণ করতে দেব? আমাদের পূর্বপুরুষেরা ত্যাগ ও তিতিক্ষার মাধ্যমে আমাদের স্বাধীনতা এনে দিয়েছেন। তারা আমাদের স্বাধীন ভারত উপহার দিয়েছেন। সেই মহান মানুষদের প্রতি আমাদের দায়িত্ব হল, আমরা যেন দেশে এই ধরনের বিষয় সহ্য না করি। এটাই হবে তাদের প্রতি প্রকৃত শ্রদ্ধাঞ্জলি।"
-প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী,
স্বাধীনতা দিবসের ভাষণে, লালকেল্লা, 15 August 2025
“मेरे प्रिय देशवासियों,
मैं आप सभी को एक चिंताजनक और गंभीर चुनौती के बारे में सचेत करना चाहता हूँ। भारत के खिलाफ लंबे समय से एक सुनियोजित षड्यंत्र चल रहा है, जिसका उद्देश्य भारत के जनसांख्यिकीय संतुलन को बदलना है।
ये अवैध घुसपैठिए हमारे देश के युवाओं से रोजगार के अवसर छीन रहे हैं। ऐसे लोग हमारे देश की बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं। वे भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। देश इसे सहन नहीं करेगा।
जब जनसंख्या संरचना में परिवर्तन होता है, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, तब राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। देश की एकता, अखंडता और विकास बाधित होते हैं। यह सामाजिक अशांति के बीज बोता है। दुनिया का कोई भी देश अवैध घुसपैठियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करता। तो फिर हम भारत को आत्मसमर्पण कैसे करने दें?
हमारे पूर्वजों ने त्याग और तपस्या के माध्यम से हमें स्वतंत्रता दिलाई है। उन्होंने हमें एक स्वतंत्र भारत सौंपा है। उन महान व्यक्तियों के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम देश में इस प्रकार की बातों को सहन न करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
स्वतंत्रता दिवस संबोधन, लाल किला
15 अगस्त 2025