डॉ. शैलेन्द्र कुमार का जन्म बथनाहा, सीतामढ़ी, बिहार में हुआ हुआ। आरंभिक शिक्षा वहीं गाँव में ही हुई। बाद में बिहार विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक करके उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ गए। आपने अनेक विषयों-विज्ञान, हिन्दी तथा रूसी भाषा व साहित्य, प्रबंधन, अर्थशास्त्र तथा संस्कृत, अंग्रेजी एवं स्पैनिश भाषाओं का अध्ययन किया है और दो बार स्नातक, चार बार परास्नातक और अंततः अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। आपको देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों-जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं भारतीय विदेश व्यापार संस्थान तथा ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। वर्ष 1992 की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करके आप केंद्रीय सचिवालय सेवा से जुड़े और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों- वाणिज्य मंत्रालय, कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग, संघ लोक सेवा आयोग, आर्थिक मामले विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रसार भारती आदि में अनेक पदों पर कार्य करते हुए सम्प्रति वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। पिछले तीन दशकों से आप लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका लेखन क्षेत्र व्यापक है। आप आर्थिक, भाषायी, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों पर लिखते हैं। आजकल इब्राहिमी मजहबों पर भी लिख रहे हैं। सन 2000 में आपकी पहली पुस्तक "विश्व व्यापार संगठनः भारत के परिप्रेक्ष्य में" राजकमल द्वारा प्रकाशित हुई, जिसे दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सन 2005 में अंग्रेजी में "Trade in Services: Advantage India" प्रकाशित हुई। इसके बाद विश्व व्यापार संबंधी दो पुस्तकों में आंशिक रूप से योगदान किया। ये पुस्तकें 2006 तथा 2007 में क्रमशः CENTAD-OXFAM तथा UNCTAD-ADB के तत्त्वावधान में प्रकाशित हुई। वर्ष 2015 में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर द्वारा भारत के सेवा व्यापार पर एक शोधलेख प्रकाशित हुआ। इनके अतिरिक्त आपके पचास से अधिक आलेख और आधा दर्जन कहानियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। अभी हाल ही में असम की सांस्कृतिक क्रांति तथा शौर्यगाथा पर केंद्रित आपकी पुस्तक "नामघर" प्रकाशित हुई है।
View Author ProfileEesawad aur Purvottar Bharat Ka Sanskritik Sanhar
Documents Christianity's expansion across northeast India's seven states and its impact on indigenous cultures and constitutional questions.