Social/Political Commentary Truth About Caste
An argument that caste has been deliberately distorted by academics and politicians — and an attempt to recover what the record actually shows.
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श्री नरेश कुमार वैद्य उर्फ घुमंतू शिक्षाविद् (जन्म 1955 ई.) एक पूर्व प्रतिष्ठित पत्रकार, विनीत एवं मृदुभाषी सामाजिक कार्यकर्ता, सुशिक्षित एवं सत्यान्वेषी लेखक, शिष्ट संपादक, भद्र प्रकाशक आदि हैं। उन्होंने 1976 ई. में मानव विज्ञान विषय में एम.एस.सी. (ऑनर्स) की शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से गृहीत की और तत्पश्चात् दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रख्यात प्रोफेसर एस. सी. तिवारी के अधीनस्थ शोध किया। उन्होंने उत्तराखंड के भोटिया और वन राजी (बान राजी), झारखंड के बिरहोर, छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवा और सहरिया समुदाय के मध्य व्यापक फील्डवर्क किया है। वह छोटानागपुर, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के दलित, शोषित एवं वंचित समुदायों के सम्मान, स्वाभिमान एवं उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए उनके मध्य "एक्शन एंथ्रोपोलॉजी" में सक्रिय गंभीर सहभागी के रूप में दशकों से कार्य करने में संलग्न हैं। दशकों से सामाजिक सेवा कार्य एवं सामाजिक परिवर्तन में रत रहने के पश्चात आपने यह अनुभव किया है कि दलित, शोषित, वंचित समुदायों के सतत पिछड़ेपन का मूल कारण 'भारतीय सामाजिक व्यवस्था' का उचित परिप्रेक्ष्य में अध्ययन नहीं होने में निहित है, अतः आप यूट्यूब चैनलों के माध्यम से 'भारतीय सामाजिक विज्ञान' का 'भारतीयकरण' करने का भगीरथ प्रयास भी कर रहे हैं।
श्री नरेश कुमार वैद्य उर्फ घुमंतू शिक्षाविद् (जन्म 1955 ई.) एक पूर्व प्रतिष्ठित पत्रकार, विनीत एवं मृदुभाषी सामाजिक कार्यकर्ता, सुशिक्षित एवं सत्यान्वेषी लेखक, शिष्ट संपादक, भद्र प्रकाशक आदि हैं। उन्होंने 1976 ई. में मानव विज्ञान विषय में एम.एस.सी. (ऑनर्स) की शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से गृहीत की और तत्पश्चात् दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रख्यात प्रोफेसर एस. सी. तिवारी के अधीनस्थ शोध किया। उन्होंने उत्तराखंड के भोटिया और वन राजी (बान राजी), झारखंड के बिरहोर, छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवा और सहरिया समुदाय के मध्य व्यापक फील्डवर्क किया है। वह छोटानागपुर, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के दलित, शोषित एवं वंचित समुदायों के सम्मान, स्वाभिमान एवं उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए उनके मध्य "एक्शन एंथ्रोपोलॉजी" में सक्रिय गंभीर सहभागी के रूप में दशकों से कार्य करने में संलग्न हैं। दशकों से सामाजिक सेवा कार्य एवं सामाजिक परिवर्तन में रत रहने के पश्चात आपने यह अनुभव किया है कि दलित, शोषित, वंचित समुदायों के सतत पिछड़ेपन का मूल कारण 'भारतीय सामाजिक व्यवस्था' का उचित परिप्रेक्ष्य में अध्ययन नहीं होने में निहित है, अतः आप यूट्यूब चैनलों के माध्यम से 'भारतीय सामाजिक विज्ञान' का 'भारतीयकरण' करने का भगीरथ प्रयास भी कर रहे हैं।
Social/Political Commentary An argument that caste has been deliberately distorted by academics and politicians — and an attempt to recover what the record actually shows.
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