Achinhit Kisse

byAbhay Vasant Marathe

Swatantrata Ki Neev Se (Part 2)

Abhay Marathe's second volume recovers suppressed histories from India's freedom struggle as a documented counter to post-Independence leftist narratives.

Overview

Abhay Vasant Marathe was offered institutional positions by establishments he considered hostile to the Indian national interest. He declined them all and continued writing without backing. That biographical fact is itself an argument for taking his work seriously — it is the output of someone who chose intellectual independence over comfort.

This second volume in the Achinhit Kisse series continues his project of recovering histories that post-Independence leftist historiography suppressed or distorted. The book challenges the narrative framework that, in Marathe's reading, was constructed after 1947 to keep India ideologically fragmented and culturally diminished. Ishwar Sharma, literary editor of Nai Dunia-Dainik Jagran, describes reading Marathe as moving through India's story of wounds and emerging to see a new sun of national self-respect rising.

The book has drawn recommendations for inclusion in school curricula under the New Education Policy, with advocates arguing that young Indians need the counter-narrative Marathe constructs before the mainstream version becomes the only version they know.

ABOUT THE BOOK: "कुछ पुस्तकें ऐसी होती हैं, जो सत्य को बिना भय के बेलाग कह देती हैं। कुछ लेखक ऐसे होते हैं, जिनमें सत्य को सर्वोच्च बल से कह देने का सलीका होता है। संयोग से प्रस्तुत पुस्तक ऐसी ही पुस्तक है, जिसने भारत के सत्य को कहा है। इसके लेखक श्री अभय मराठे में सत्य का गहन अन्वेषण करने और उसे सटीक मारक क्षमता के साथ कह देने का साहस है। यह पुस्तक ऐसी है, जिसे वामपंथी नैरेटिव की तथ्यपरक काट माना जा सकता है। वस्तुत: यह भारतवर्ष का दुर्भाग्य रहा है कि स्वतंत्रता के बाद सत्ता के इशारों पर ऐसे विमर्श का षड्यंत्र रचा गया, जिसने भारत को अपमानित, वैचारिक रूप से खंडित और स्वाभिमान से रहित बनाने का कुचक्र चलाया। किंतु यह भारत का सौभाग्य है कि इस राष्ट्र के पास श्री अभय मराठे जैसे लेखक भी हैं, जिन्होंने धारा के विपरीत जाकर भारत के स्वाभिमान की गौरव गाथा लिखी। भारत विरोधी सत्ता प्रतिष्ठानों की ओर से अकादमियों में नियुक्ति सहित लाभ के पदों के कई प्रस्ताव श्री मराठे को मिले होंगे, किंतु उन्होंने अपनी आर्थिक विपन्नता को अपने स्वाभिमान का सर्वोच्च आभूषण बनाया और अपने लेखक-विचारण में भारत-विचार को सर्वोच्च रखा। यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसके अंशों या पाठों को नई शिक्षा नीति के पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए भारत के बच्चे-बच्चे को पढ़ाया जाना चाहिए। इसमें वर्णित सत्य का भारत की अन्य भाषाओं में अनुवाद हो और इसे प्रत्येक राज्य के पाठ्यक्रम में लिया जाए, ताकि नई पीढ़ी जान सके कि छद्म क्या था और सत्य क्या है। एक संपादक होने के नाते जब-जब श्री अभय मराठे के लेखन से मेरा गुजरना हुआ, मुझे अनुभूत हुआ कि मैं भारत के अश्रुओं की संघर्षमय गाथा से गुजर रहा हूं और सामने राष्ट्र के स्वाभिमान का नया सूर्य उदित होते हुए देख रहा हूं। श्री मराठे जैसे राष्ट्रजीवी हर कालखंड में रहे हैं, तभी तो भारतवर्ष के रूप में विश्व की सर्वश्रेष्ठ सभ्यता व सर्वोत्तम संस्कृति लाख घावों के बाद भी पुलकित और पल्लवित है।" -ईश्वर शर्मा साहित्य संपादक नईदुनिया-दैनिक जागरण

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Abhay Vasant Marathe

लेखक बाल्य काल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नियमित शाखाओं में जाने के कारण उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बारे में जानने की जिज्ञासा निर्माण हुई।लेखक ने अपनी इस क्षुधा को विभिन्न लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकें पढ़कर शांत करने का प्रयास किया l इस प्रकार लेखक का विगत दो दशकों से अध्ययन कार्य जारी रहा। इस दौरान लेखक श्री अभय वसंत मराठे द्वारा लिखित दो पुस्तकें प्रकाशित हुई। "ओ!उठो क्रांतिवीरों" जिसमें लगभग ८०० से अधिक ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों के बारे में लिखा गया है। लेखक की दूसरी पुस्तक "अमर क्रांतिवीर उमाजी राजे" का प्रकाशन २०२२ में किया गया।इस अज्ञात क्रांतिकारी को पुस्तक के रूप में लाने का आग्रह प्रसिद्ध इतिहासकार स्व .बाबा साहेब पुरंदरे ने लेखक को किया था। पुस्तकों की रचनाओं के साथ लेखक श्री अभय वसंत मराठे के अनेक लेख पत्र -पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए है।जिसका विषय प्रमुखता से भारतीय स्वतंत्रता के संग्राम का इतिहास तथा स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों का रहा है। दैनिक पत्र नईदुनिया (जागरण) के "किस्सा कुछ यू था" कालम में लेखक द्वारा लिखित १५० से अधिक ऐतिहासिक तथा अनछुएं किस्से प्रकाशित हुए l इसके साथ ही लेखक ने विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालयों तथा सामाजिक संस्थाओं में व्याख्यान सत्रों में मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता कर ज्ञात तथा अज्ञात क्रांतिकारी तथा ऐतिहासिक घटनाओं को लोगों के समक्ष रखा l इसमें कुछ ऑनलाइन भी व्याख्यान हुए थे। लेखक का प्रमुख उद्देश्य यह है कि लोगों को खासकर नवीन पीढ़ी के बच्चों को भारतीय स्वतंत्रता के महान इतिहास के बारे जानकारी प्राप्त हो और उसे पढ़कर ,जानकर वे राष्ट्रवाद , राष्ट्रसेवा में अपना योगदान दे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई अनछुए पहलू व क्रांतिकारियों के कुछ अनसुने किस्सों को पर्याप्त स्थान प्राप्त नहीं हो सका इसलिए लेखक का यह महत्त्वपूर्ण प्रयास रहा हैं कि ऐसे "अचिह्नित" किस्से जनमानस के समक्ष आ जाए।

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WA