Valmiki Ramayan: Jan Jan ki Bhasha Mein

byRajendra Kumar Gupta

वाल्मीकि रामायण-जन जन की भाषा में

Valmiki's Ramayan retold in flowing Hindi verse, faithful to the original six kandas and their cosmic chronology.

Overview

Seven thousand years before the present era — if the planetary positions recorded at the births of Ram and his brothers are calculated astronomically — Maharishi Valmiki composed what would become the foundational text of Indian civilisation. Valmiki was Ram's contemporary: when he asked Devarshi Narad who among all living men was most virtuous, Narad named Ram. That contemporaneity gives the Ramayan a quality no later retelling can replicate — an eyewitness proximity to a man whose life argues that ideal, dignified conduct is not impossible for a human being, only difficult.

Rajendra Kumar Gupta's rendering brings this adi-kavya into accessible Hindi verse without stripping away its substance. The six kandas — Bal, Ayodhya, Aranya, Kishkindha, Sundar, and Yuddha — move at the pace of the original story rather than scholarly commentary. Divine weapons granted to Ram by Vishwamitra and Agastya are named. The Ram-Ravan war receives detailed narration. And the qualities of Ram-Rajya — the political ideal the epic projects — are presented in full. Where multiple sargas were thematically continuous, Gupta consolidates them rather than fragmenting the narrative, preserving the story's momentum.

For readers who have encountered the Ramayan only through later retellings or televised adaptations, this is a return to the source — a version that holds the original's weight without requiring knowledge of Sanskrit.

-:किताब के बारे में:- मानव चरित्र के सर्वोत्तम उत्कर्ष को दर्शाता महर्षि वाल्मीकि प्रणीत यह आदि काव्य श्रीमद्वाल्मीकीय रामायणम् एक अद्वितीय ग्रंथ है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र एक मानव के रूप में वर्णित किया गया है जो यह संदेश देता है कि मानव के लिए ऐसा आदर्श और अनुकरणीय जीवन जीना दुखकर भले ही हो परन्तु असम्भव नहीं है। महर्षि वाल्मीकि श्रीराम के समकालीन थे। देवर्षि नारद से पूछने पर कि इस समय संसार में सबसे गुणवान कौन है, देवर्षि नारद उन्हें श्रीराम के विषय में बताते हैं जो यह सिद्ध करता है कि वे श्रीराम के समकालीन थे। महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम और उनके भाइयों के जन्म नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति का वर्णन किया है। इन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की ज्योतिषीय गणना कर रामायण काल के समय का भी आकलन किया जा सकता है, जो सम्भवतः अब से करीब सात हजार वर्ष से अधिक पूर्व का है। यह पुस्तक महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण को साधारण जन जन की भाषा में काव्यरूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। इस प्रस्तुति में वाल्मीकीय रामायण के उन विवरणों को छोड़ दिया गया है जो मूल कथा के प्रवाह के लिए अत्यन्त आवश्यक नहीं थे। वाल्मीकीय रामायण में छः काण्ड हैं यथा बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड और युद्धकाण्ड और प्रत्येक काण्ड अनेक सर्गों में विभाजित है। इस अनुवाद में विषय और कविता का प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिकतर कई सर्गों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। महर्षि विश्वामित्र और ऋषि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को दिए गए दिव्य अस्त्र जिनसे उन्हें अजेय बनाने में सहायता की, उनका नाम भी इस पुस्तक में दिया गया है। श्रीराम-रावण के युद्ध का विशद वर्णन और रामराज्य की कुछ विशेषताएँ भी इस पुस्तक में दी गयी हैं।

Author

Rajendra Kumar Gupta

लेखक परिचय: इंजीनियरिंग एवं कानून विधाओं में स्नातक, राजेन्द्र कुमार गुप्ता भारत सरकार के सेवानिवृत आई. आर. एस. अधिकारी हैं l 38 वर्ष की सेवा में विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में सेवा के उपरान्त वे चेयरमैन, सैटलमेंट कमीशन के पद से सन 2012 में सेवानिवृत हुए l सूफी-संत परमसंत ठाकुर रामसिंहजी, महात्मा डॉ. चन्द्र गुप्ता एवं महात्मा श्री कृष्ण कुमार गुप्ता की सेवा में रहकर अध्यात्म में गहरी रूचि के चलते लेखक ने धर्म एवं अध्यात्म सम्बन्धी कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें कुछ मुख्य पुस्तके हैं-'श्रीकृष्णचरितामृत' (भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन चरित्र, काव्यमय पदों में) 'सस्ता साहित्य मण्डल' द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'ईश वाणी' (श्रीमदभगवद्गीता, बाइबिल एवं कुरआन काव्यमय पदों में)-'BRPC Ltd. द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'नक्शबंदी सूफी संत'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2018 में प्रकाशित; 'Saints and Mahatmas of India', 'BRPC Ltd. द्वारा 2012 में प्रकाशित; 'The Science and Philosophy of Spirituality'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2006 में प्रकाशित; '101 सूफी कहानियाँ'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2019 में प्रकाशित l इनके अलावा लेखक की अन्य पुस्तकें भी उनकी वेबसाइट www.sufisaints.net पर देखी जा सकती हैं l इन सभी पुस्तकों में लेखक का प्रयास अध्यात्म-रूपी गहन विषय को सीधे-सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का रहा है ताकि वह जन-साधारण को आसानी से ग्राह्य हो सके l लेखक की अभिरुचि मुख्यत: धर्म के अध्यात्मिक पक्ष में होने के कारण उन्होंने अपनी पुस्तकों में अध्यात्मिकता को ही प्राथमिकता दी हैl प्रस्तुत पुस्तक "उपनिषद् सार" में भी उन्होंने उपनिषदों के अध्यात्मिक पक्ष को ही मुख्य रूप से पाठकों के सामने रखने का प्रयत्न किया है l

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