Sant Tiruvalluvar Tirukkural: Jan-Jan Ki Bhasha Mein

byRajendra Kumar Gupta

All 1330 kurals of the Tirukkural rendered in clear modern Hindi, with original Tamil verses, by the saint Tiruvalluvar.

Overview

Composed by the Tamil saint-philosopher Tiruvalluvar — revered across South India as a figure comparable to Kabir — the Tirukkural is one of the oldest and most comprehensive ethical texts in any Indian language. Its 1330 kurals address the three great pursuits of human life: dharma, artha, and kama. Written when kings ruled and governance was the primary concern, the verses proved durable enough to guide ordinary life just as effectively — and they remain so today.

Rajendra Kumar Gupta's Hindi rendering keeps all 1330 kurals intact, pairing each one with its original Tamil verse. Rather than producing a word-for-word translation, Gupta has worked to capture the spirit and intent of each kural — the felt meaning rather than the literal one — rendering the wisdom in clear, modern Hindi accessible to students, teachers, and general readers alike. The Tirukkural's central message is unambiguous: earn wealth through righteous means, transcend desire, and move toward liberation.

For Hindi readers who have heard of this text but never had a suitable edition to read it in, this volume closes that gap.

-:पुस्तक परिचय:- तिरुक्कुरल' आदि कबीर कहे जाने वाले दक्षिण भारत के महान संत तिरुवल्लुवर के नीति वाक्यों का संग्रह है। संत तिरुवल्लुवर के ये नीति वाक्य उस समय जब राजा राज्य किया करते थे, राजाओं द्वारा राज्य को सुचारू रूप से चलाने से संदर्भित थे, लेकिन वे आज भी उतने ही प्रासंगिक और सारगर्भित हैं। राजाओं के ही लिए नहीं अपितु साधारण जनमान्य के लिए भी ये उतने ही उपयोगी हैं। हिन्दू जीवन पद्धति के अनुसार मनुष्य के लिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चार पुरुषार्थ सिद्ध करना उसके जीवन का लक्ष्य होता है। तिरुक्कुरल में धर्म, अर्थ और काम, इन तीनों पुरुषार्थों का विशद विवेचन किया गया है। इस ग्रन्थ का मुख्य सन्देश धर्मपूर्वक धन अर्जित कर उसके द्वारा अपनी इच्छाओं से उबर, चौथे पुरुषार्थ मोक्ष की और अग्रसर होना है। तिरुक्कुरल में 1330 कुरल हैं जिनका भावानुवाद इस पुस्तक में 1330 पदों में ही किया गया है। इस भावानुवाद में शब्दार्थ पर जोर न देकर प्रत्येक कुरल के भाव को ग्रहण करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक की विशेषताएँ: मूल तमिल श्लोक (कुरल) सहित भावार्थ सरल, स्पष्ट और आधुनिक हिंदी भाषा में व्याख्या जीवन मूल्यों, नीति, सदाचार और व्यावहारिक ज्ञान का संग्रह विद्यार्थियों, अध्यापकों और आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी तिरुवल्लुवर का संदेश कालातीत है- सत्य, न्याय, करुणा और सद्गुण ही मानव जीवन की वास्तविक पहचान हैं।

Author

Rajendra Kumar Gupta

लेखक परिचय: इंजीनियरिंग एवं कानून विधाओं में स्नातक, राजेन्द्र कुमार गुप्ता भारत सरकार के सेवानिवृत आई. आर. एस. अधिकारी हैं l 38 वर्ष की सेवा में विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में सेवा के उपरान्त वे चेयरमैन, सैटलमेंट कमीशन के पद से सन 2012 में सेवानिवृत हुए l सूफी-संत परमसंत ठाकुर रामसिंहजी, महात्मा डॉ. चन्द्र गुप्ता एवं महात्मा श्री कृष्ण कुमार गुप्ता की सेवा में रहकर अध्यात्म में गहरी रूचि के चलते लेखक ने धर्म एवं अध्यात्म सम्बन्धी कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें कुछ मुख्य पुस्तके हैं-'श्रीकृष्णचरितामृत' (भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन चरित्र, काव्यमय पदों में) 'सस्ता साहित्य मण्डल' द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'ईश वाणी' (श्रीमदभगवद्गीता, बाइबिल एवं कुरआन काव्यमय पदों में)-'BRPC Ltd. द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'नक्शबंदी सूफी संत'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2018 में प्रकाशित; 'Saints and Mahatmas of India', 'BRPC Ltd. द्वारा 2012 में प्रकाशित; 'The Science and Philosophy of Spirituality'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2006 में प्रकाशित; '101 सूफी कहानियाँ'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2019 में प्रकाशित l इनके अलावा लेखक की अन्य पुस्तकें भी उनकी वेबसाइट www.sufisaints.net पर देखी जा सकती हैं l इन सभी पुस्तकों में लेखक का प्रयास अध्यात्म-रूपी गहन विषय को सीधे-सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का रहा है ताकि वह जन-साधारण को आसानी से ग्राह्य हो सके l लेखक की अभिरुचि मुख्यत: धर्म के अध्यात्मिक पक्ष में होने के कारण उन्होंने अपनी पुस्तकों में अध्यात्मिकता को ही प्राथमिकता दी हैl प्रस्तुत पुस्तक "उपनिषद् सार" में भी उन्होंने उपनिषदों के अध्यात्मिक पक्ष को ही मुख्य रूप से पाठकों के सामने रखने का प्रयत्न किया है l

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