Kayastha Samaj Mein Vivah Sanskar

byB. B. Lal,Meera Srivastava

कायस्थ समाज में विवाह संस्कार

The first comprehensive guide to Kayastha wedding rituals — Sanatana ceremonies and traditions of North India documented in full.

Overview

Every Kayastha family approaching a wedding faces the same situation: the rites and rituals that have defined these ceremonies across North India for generations are carried in the memory of elders, not in any written guide. B. B. Lal and Meera Srivastava have produced what a former judge of the Allahabad High Court, Justice Anurag Kumar, has described as the first comprehensive book on this subject — a complete account of the marriage sanskars as they are performed within the Kayastha community.

The book documents the full sequence of Sanatana rituals and ceremonies that accompany a Kayastha wedding, with particular attention to the traditions that have remained consistent across North India through generations. It is the kind of reference that parents, families, and officiants can consult when organising a wedding for their children — ensuring the correct observances are followed and understood, not merely performed.

For Kayastha families in India and abroad who want to maintain these traditions with accuracy, the book serves as both a practical guide and a cultural record of what would otherwise remain unwritten.

-:किताब के बारे में:- "यह पुस्तक आने वाले समय में भारत और भारत के बाहर हमारे सभी कायस्थ भाइयों और बहनों को विवाह से संबंधित रीति रिवाजों को जानने में अत्यधिक मददगार साबित होगी। मेरी जानकारी में इस विषय पर यह पहली पुस्तक है और काफ़ी विस्तृत है।" - जस्टिस अनुराग कुमार भूतपूर्व जज, इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रत्येक माता-पिता अपने बेटे या बेटी के विवाह के महत्वपूर्ण अवसर पर अपने परिवार/समुदाय से जुड़े निर्धारित संस्कारों और रीति-रिवाजों का पालन करना चाहते हैं और अपने दिल के टुकड़े तथा उसके जीवन साथी की शाश्वत ख़ुशी के लिए सर्वशक्तिमान से प्रार्थना करते हैं और आशीर्वाद भी माँगते हैं। "कायस्थ समाज में विवाह संस्कार" भारत के कायस्थ समुदाय में विवाह के दौरान शामिल सनातन रीति-रिवाजों और समारोहों का सम्पूर्ण वर्णन प्रस्तुत करती है; विशेषकर उन सनातन परंपराओं का जो समस्त उत्तर भारत के कायस्थों में युगों से प्रचलित रही हैं।

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B. B. Lal

-:लेखक परिचय:- बी.बी.लाल (आई. टी. एस.) 2004 में भारत सरकार के दूरसंचार विभाग में महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए। देश भर में विभिन्न स्थानों पर पोस्टिंग के साथ-साथ उन्होंने तंजानिया, मेडागास्कर और मोजाम्बिक में भी दूर संचार परियोजनाओं को पूरा किया। उन्होंने काबुल में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य किया। वे गीत संगीत के बेहद शौकीन हैं तथा टेनिस खेलने में भी बहुत रूचि रखते हैं। उन्होंने कई छोटी फिल्में भी बनाई हैं। वह पहले दो पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं। पहली पुस्तक "दादा आओ..यहाँ बहुत गुलगुला है"; अपने और अपने परिवार के विषय पर है। दूसरी पुस्तक "ब्रेकिंग बैरियर्स, द पॉवर ऑफ़ जेस्चर्स"; चालीस भाषाओं में, अनेक देशों और भारत के विभिन्न प्रांतों के अभिवादन और जेस्चर्स के विषय पर है। अपने जीवन के अनुभवों और घटनाओं पर आधारित लघुकथाओं को समेटती उनकी तीसरी पुस्तक "फतेहपुर के परिंदे" तैयारी के अंतिम चरण में है। कायस्थ समाज के रीति-रिवाज और मान्यताएं उनका ध्यान हमेशा आकर्षित करती रही हैं। "कायस्थ समाज में विवाह संस्कार", विवाह के दौरान रीति-रिवाजों और परंपराओं की निरंतरता पर उनकी लंबे समय के अनुभव व विचारों का परिणाम है।

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Meera Srivastava

मीरा श्रीवास्तव राजनीति विज्ञान में सन् 1968 की स्नातकोत्तर हैं। बचपन से ही उन्हें संगीत, खाना पकाने, सामाजिक कार्य और घर की सजावट जैसी गतिविधियों में बहुत रुचि थी। वर्तमान में वह भारत विकास परिषद, लखनऊ में, एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी हैं। उनका विवाह आठ भाई-बहनों वाले परिवार में हुआ था। इस परिवार की अगली पीढ़ी में कुल मिला कर पैंतीस बच्चे हैं जो कि देश विदेश में बसे हुए हैं । वह इन सभी शादियों में बहुत रुचि, उत्साह और नेतृत्वकारी भूमिका में शामिल हुई हैं। कायस्थ समुदाय में परिवार के भीतर और बाहर विवाह गतिविधियों का यह लंबा अनुभव इस पुस्तक "कायस्थ समाज में विवाह संस्कार" की सामग्री को तय करने में बहुत उपयोगी साबित हुआ।

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