Upanishadsar (Hindi)

byRajendra Kumar Gupta

All eleven principal Upanishads in one volume — Sanskrit mantras with flowing Hindi exposition for readers new to Vedic philosophy.

Overview

The Upanishads gave the world phrases that have never stopped circulating: "Satyameva jayate" (truth alone triumphs), "Atithi devo bhava" (the guest is God), "Tat tvam asi" (thou art that). But the eleven principal texts from which these sayings come — the Isha, Kena, Katha, Prashna, Mundaka, Mandukya, Aitareya, Taittiriya, Shvetashvatara, Chandogya, and Brihadaranyaka — have remained largely inaccessible to readers without a grounding in classical Sanskrit. Most available translations are either too literal to follow or too loose to trust.

Rajendra Kumar Gupta, a retired IRS officer and follower of Paramhans Thakur Shri Ramsinhji's spiritual tradition, has compiled the spiritual essence of all eleven Upanishads in a single volume. Each mantra is presented in its original Sanskrit alongside a lyrical Hindi rendering that captures the meaning rather than the words. The continuity of the text is never broken by technical asides; the philosophy unfolds as it would in a patient conversation between teacher and student.

For anyone who has wanted to understand what the Upanishads actually say — about Brahman, the self, liberation, and the relationship between the individual and the cosmos — this is a rare single-volume entry point that neither oversimplifies nor intimidates.

-:किताब के बारे में:- उपनिषद् वैदिक साहित्य का निचोड़, भारतीय आध्यात्मिक चिंतन और दर्शन के मूलाधार और उत्कृष्ट स्रोत हैं। उपनिषद् शब्द का साधारण अर्थ है- समीप उपवेशन या समीप बैठना, अर्थात ब्रह्मविद्या की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के समक्ष उपस्थित होना। इनमें वेदों का सार तत्त्व अर्थात ब्रह्मविद्या का सार समाहित है। यों तो उपनिषदों की संख्या 108 है, लेकिन इनमें ग्यारह उपनिषद् यथा ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, श्वेताश्वतर, छान्दोग्योपनिषद् और बृहदारण्यकोपनिषद् मुख्य हैं, जिनमें ब्रह्म तत्त्व का विषद विवेचन किया गया है। इन उपनिषदों का मुख्यः उद्देश्य ब्रह्म की पूर्णता, कैवल्यता और उसकी सर्वव्यापकता प्रतिपादित करना है। उपनिषदों की मूल भाषा संस्कृत होने और उपलब्ध अनुवाद भी प्रायः सरल भाषा में न होने से, इस आध्यात्मिक ज्ञान के भण्डार तक जन सामान्य की पहुँच सीमित ही रही है। इस पुस्तक में इन ग्यारह उपनिषदों के अध्यात्मिक पक्ष का सारतत्त्व मूल संस्कृत मन्त्रों के साथ सरल जन जन की भाषा में काव्यात्मक पदों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामान्य जनों को इन उपनिषदों में निहित अमूल्य ज्ञान से परिचित कराना मात्र है। पाठ्य को सुरुचिपूर्ण और उसकी निरंतरता और तारतम्यता बनाए रखने के लिए मूल मन्त्रों का शब्दतः अनुवाद न कर इस पुस्तक में इन मन्त्रों में निहित भाव को ग्रहण करने का प्रयास किया गया है। 'सत्यमेव जयते' अर्थात सत्य ही विजयी होता है, असत्य नहीं, 'अतिथि देवो भवः' "तत्त्वमसि' अर्थात 'सोई तू है' (Thou Art That), 'असतो मा सद्रमय, " तमसो मा ज्योतिर्गमय, और' मृत्योर्मामृतं गमय' जैसे प्रसिद्द शाश्वत वाक्य इन्हीं उपनिषदों की देन हैं। सेवानिवृत IRS अधिकारी, राजेन्द्र कुमार गुप्ता, परमसंत ठाकुर श्रीरामसिंहजी और उनकी आध्यात्मिक परम्परा के अनुयायी हैं। श्रीमद्भगवद्गीता, बाइबल, कुरआन, रामायण, श्रीकृष्णचरितामृत आदि की सरल काव्यात्मक पदों में प्रस्तुति और सूफिज्म पर पुस्तकें प्रकाशित करा वे लोगों की धर्म व आध्यात्मिकता के विभित्र पक्षों में रुचि जाग्रत करने के कार्य में निरन्तर प्रयासरत हैं।

Author

Rajendra Kumar Gupta

लेखक परिचय: इंजीनियरिंग एवं कानून विधाओं में स्नातक, राजेन्द्र कुमार गुप्ता भारत सरकार के सेवानिवृत आई. आर. एस. अधिकारी हैं l 38 वर्ष की सेवा में विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में सेवा के उपरान्त वे चेयरमैन, सैटलमेंट कमीशन के पद से सन 2012 में सेवानिवृत हुए l सूफी-संत परमसंत ठाकुर रामसिंहजी, महात्मा डॉ. चन्द्र गुप्ता एवं महात्मा श्री कृष्ण कुमार गुप्ता की सेवा में रहकर अध्यात्म में गहरी रूचि के चलते लेखक ने धर्म एवं अध्यात्म सम्बन्धी कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें कुछ मुख्य पुस्तके हैं-'श्रीकृष्णचरितामृत' (भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन चरित्र, काव्यमय पदों में) 'सस्ता साहित्य मण्डल' द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'ईश वाणी' (श्रीमदभगवद्गीता, बाइबिल एवं कुरआन काव्यमय पदों में)-'BRPC Ltd. द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'नक्शबंदी सूफी संत'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2018 में प्रकाशित; 'Saints and Mahatmas of India', 'BRPC Ltd. द्वारा 2012 में प्रकाशित; 'The Science and Philosophy of Spirituality'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2006 में प्रकाशित; '101 सूफी कहानियाँ'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2019 में प्रकाशित l इनके अलावा लेखक की अन्य पुस्तकें भी उनकी वेबसाइट www.sufisaints.net पर देखी जा सकती हैं l इन सभी पुस्तकों में लेखक का प्रयास अध्यात्म-रूपी गहन विषय को सीधे-सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का रहा है ताकि वह जन-साधारण को आसानी से ग्राह्य हो सके l लेखक की अभिरुचि मुख्यत: धर्म के अध्यात्मिक पक्ष में होने के कारण उन्होंने अपनी पुस्तकों में अध्यात्मिकता को ही प्राथमिकता दी हैl प्रस्तुत पुस्तक "उपनिषद् सार" में भी उन्होंने उपनिषदों के अध्यात्मिक पक्ष को ही मुख्य रूप से पाठकों के सामने रखने का प्रयत्न किया है l

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