Brahadarnyaka Upanishadsar (Hindi)

byRajendra Kumar Gupta

Brihadaranyaka Upanishad's core teachings — including the Yajnavalkya-Maitreyi dialogues — rendered in accessible lyrical Hindi.

Overview

Among the eleven principal Upanishads, the Brihadaranyaka stands apart — the largest of them all, studied in the forest, and the source of three verses that have echoed through Indian civilization for millennia: "Asato ma sadgamaya" (lead me from untruth to truth), "Tamaso ma jyotirgamaya" (lead me from darkness to light), and "Mrityor ma amritam gamaya" (lead me from death to immortality). Its central dialogues — Sage Yajnavalkya's conversations with Maitreyi and the debates in King Janaka's court — address the most fundamental questions in Vedic philosophy: the identity of Brahman and Atman, the doctrine of Madhuvidhya, and the nature of prana.

Rajendra Kumar Gupta, a retired IRS officer and follower of the spiritual tradition of Paramhans Thakur Shri Ramsinhji, renders this dense Upanishad accessible without sacrificing its depth. Rather than translating each Sanskrit mantra word for word, he captures the underlying meaning in flowing, lyrical Hindi. The result is a text that preserves the continuity and coherence of the original while stripping away the barriers of classical Sanskrit that have kept this wisdom beyond the reach of ordinary readers.

For those who have heard these ancient mantras without knowing their source — or who have wanted to understand why Yajnavalkya told Maitreyi that the self is the only thing worth knowing — this is the book to read.

-:किताब के बारे में:- वैदिक साहित्य के निचोड़ उपनिषदों में बृहदारण्यकोपनिषद् सार एक मुख्य उपनिषद् है। सभी उपनिषदों में आकार की दृष्टि से बृहत् होने और अरण्य अर्थात वन में अध्ययन किए जाने के कारण इसे बृहदारण्यकोपनिषद् कहा गया है। इस उपनिषद् में सृष्टिरूप यड़ा को अश्वमेघ के विराट अश्व के रूप में निरुपित किया गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, प्राण की महिमा, ब्रह्म की सर्वरूपता आदि इस उपनिषद् की विषय वस्तु है। बहुचर्चित मन्त्र 'असतो मा सद्रमय, 'तमसो मा ज्योतिर्गमय,' और 'मृत्योर्मामृतं गमय' इसी उपनिषद् की देन हैं। ऋषि याज्ञवल्क्य और मैत्रेयि के प्रसिद्द संवाद के द्वारा ब्रह्म और आत्मा का अभेद और इसके साथ ही इस उपनिषद् में मधुविद्या और उसकी परम्परा का भी प्रतिपादन किया गया है। मधु-अर्थात कार्य; जिस प्रकार अनेक मधुकरों द्वारा एक मधु का छत्ता तैयार किया हुआ होता है वैसे ही पञ्चमहाभूत, सूर्य, चन्द्र आदि भूतों के और भूत उनके कार्य हैं। इसी उपनिषद् में विदेहराज जनक की सभा में उपस्थित अन्य विद्वानों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तरों के माध्यम से ऋषि याज्ञवल्क्य द्वारा ब्रह्मज्ञान का प्रतिपादन किया गया है। देवताओं की संख्या की प्रचलित मान्यता 33 करोड़ के स्थान पर इस उपनिषदों देवताओं की संख्या मुख्यतः तैतीस बताई गई है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनों को सीधी-सरल-सरस भाषा में इस उपनिषद् में निहित अमूल्य ज्ञान से परिचित कराना मात्र है। पाठ्य को सुरुचिपूर्ण और उसकी निरंतरता और तारतम्यता बनाए रखने के लिए मूल मन्त्रों का शब्दतः अनुवाद न कर उनके भाव को ग्रहण करने का प्रयास किया गया है। सेवानिवृत IRS अधिकारी, राजेन्द्र कुमार गुप्ता, परमसंत ठाकुर श्रीरामसिंहजी और उनकी आध्यात्मिक परम्परा के अनुयायी हैं। श्रीमद्भगवद्गीता, बाइबल, कुरआन, रामायण, श्रीकृष्णचरितामृत आदि की सरल काव्यात्मक पदों में प्रस्तुति और सूफिज्म पर पुस्तकें प्रकाशित करा वे लोगों की धर्म व आध्यात्मिकता के विभिन्न पक्षों में रुचि जाग्रत करने के कार्य में निरन्तर प्रयासरत हैं।

Author

Rajendra Kumar Gupta

लेखक परिचय: इंजीनियरिंग एवं कानून विधाओं में स्नातक, राजेन्द्र कुमार गुप्ता भारत सरकार के सेवानिवृत आई. आर. एस. अधिकारी हैं l 38 वर्ष की सेवा में विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में सेवा के उपरान्त वे चेयरमैन, सैटलमेंट कमीशन के पद से सन 2012 में सेवानिवृत हुए l सूफी-संत परमसंत ठाकुर रामसिंहजी, महात्मा डॉ. चन्द्र गुप्ता एवं महात्मा श्री कृष्ण कुमार गुप्ता की सेवा में रहकर अध्यात्म में गहरी रूचि के चलते लेखक ने धर्म एवं अध्यात्म सम्बन्धी कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें कुछ मुख्य पुस्तके हैं-'श्रीकृष्णचरितामृत' (भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन चरित्र, काव्यमय पदों में) 'सस्ता साहित्य मण्डल' द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'ईश वाणी' (श्रीमदभगवद्गीता, बाइबिल एवं कुरआन काव्यमय पदों में)-'BRPC Ltd. द्वारा 2023 में प्रकाशित; 'नक्शबंदी सूफी संत'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2018 में प्रकाशित; 'Saints and Mahatmas of India', 'BRPC Ltd. द्वारा 2012 में प्रकाशित; 'The Science and Philosophy of Spirituality'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2006 में प्रकाशित; '101 सूफी कहानियाँ'- 'BRPC Ltd. द्वारा 2019 में प्रकाशित l इनके अलावा लेखक की अन्य पुस्तकें भी उनकी वेबसाइट www.sufisaints.net पर देखी जा सकती हैं l इन सभी पुस्तकों में लेखक का प्रयास अध्यात्म-रूपी गहन विषय को सीधे-सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का रहा है ताकि वह जन-साधारण को आसानी से ग्राह्य हो सके l लेखक की अभिरुचि मुख्यत: धर्म के अध्यात्मिक पक्ष में होने के कारण उन्होंने अपनी पुस्तकों में अध्यात्मिकता को ही प्राथमिकता दी हैl प्रस्तुत पुस्तक "उपनिषद् सार" में भी उन्होंने उपनिषदों के अध्यात्मिक पक्ष को ही मुख्य रूप से पाठकों के सामने रखने का प्रयत्न किया है l

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