Shauryakarman

byAtul Kumar Mishra

Arjun aur Abhimanyu kee Veergaatha

A classical Hindi verse epic recovering Arjun and Abhimanyu's true martial greatness from Vedvyas's original Mahabharat.

Overview

How great was Arjun — against Karna, against Bhishma, against the finest warriors of his age? And what actually happened on that cursed day when Abhimanyu entered the Chakravyuha alone? Contemporary retellings, drawn from television serials and loose adaptations, leave both questions largely unanswered. Atul Kumar Mishra returns to Maharshi Vedvyas's original Mahabharat to retrieve what has been lost.

Shauryakarman is composed in classical, Sanskritic Hindi, with a metre crafted to carry both the precision of a scholar and the rhythm of a bard — reviewers have noted it can be sung. Mishra reconstructs Arjun's martial achievements with fidelity to the source, and restores Abhimanyu to his full stature as a warrior rather than reducing him to a figure of pathos. Every engagement, every opponent, every outcome is drawn from Vedvyas's text.

For readers who want the Mahabharat as its author wrote it — not as cable television reimagined it — this verse retelling is a corrective and a celebration.

ABOUT THE BOOK:- अर्जुन एक श्रेष्ठ धनुर्धर थे, इस तथ्य से तो सब अवगत हैं परन्तु कितने श्रेष्ठ थे? क्या वह कर्ण से अधिक श्रेष्ठ थे? क्या वह भीष्म पितामह से अधिक श्रेष्ठ थे? क्या वे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, अथवा उनसे श्रेष्ठ भी कोई था? अभिमन्यु का वध कौरवों ने छल से, और क्षात्र धर्मों का उल्लंघन करते हुए किया। परन्तु वध के पूर्व अभिमन्यु ने कैसा युद्ध किया? किन वीरों से उनका युद्ध हुआ? उन युद्धों के परिणाम क्या थे? ये कुछ ऐसे प्रश्न है जिनका उत्तर आपको समकालीन पुस्तकों में नहीं मिलेगा। टीवी और चलचित्रों से इतिहास का ज्ञान लेने वाले इस युग में वास्तविक इतिहास कहीं दूर पीछे छूट गया है। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और फारसी की मिश्रित भाषा में लिखित समकालीन पुस्तक, अर्जुन के शौर्य के विषय में मौन ही रहते हैं और अभिमन्यु को तो केवल एक दुःखार्त चरित्र के रूप में ही परिभाषित करते हैं। महाभारत के दो महावीरों का यह विकृत चित्रीकरण, महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत का सर्वथा अपमान है। इस पुस्तक में लेखक भाषा की शुद्धता और काव्य के लय पर ध्यान देने के साथ, इन दो महावीरों का सम्पूर्ण चरित्र चित्रण भी करते हैं। आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को महर्षि वेदव्यास के मूल महाभारत की ओर आकर्षित करेगी। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः इस पुस्तक में लेखक ने महाभारत की कथाओं को नई दृष्टि से देखने का प्रयास किया है। इस मनोरम कविता में, अर्जुन, अभिमन्यु तथा महाभारत के अन्य पात्रों की कथाएँ मानों स्वयं ही बोल उठती है। भाषा शैली उत्कृष्ट है और लय ऐसा कि इसे सुर-बद्ध कर गाया भी जा सकता है। इस अभूतपूर्व रचना के सृजन के लिए अतुल जी को कोटि कोटि साधुवाद। - अशोक श्रीवास्तव Senior Editor, DD News यह केवल एक कविता मात्र नहीं वरन एक यात्रा है - जो आपको अभिमन्यु और अर्जुन की वीरता से परिचित कराती है। शास्त्रीय संस्कृतनिष्ठ हिंदी पर अतुल जी की पकड़ सराहनीय है। भारतीय पद्य इतिहास में यह महाकाव्य अपना एक अलग स्थान बनाएगी। - हर्ष गुप्ता "मधुसूदन" Investor, Economist and Best-Selling Author

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Atul Kumar Mishra

ABOUT THE AUTHOR:- अतुल कुमार मिश्रा, शिक्षा से संगणक विज्ञान अभियंता है। वे प्रख्यात मीडिया समूह TFI Media के संस्थापक और CEO हैं। उनके द्वारा स्थापित "The Frustrated Indian" पोर्टल, भारत में राजनैतिक मतों के आदान-प्रदान का प्रथम मंच था। दस वर्ष तक आईटी क्षेत्र में सेवा देने का पश्चात अतुल जी ने TFI Media की स्थापना की, जो आज भारत के साथ सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है। अपने पितामह के निदेश में पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रों का अध्ययन अतुल जी ने बाल्यकाल में ही कर दिया था। "महाभारत के महावीर" उनकी प्रथम पुस्तक है। वे अपनी पत्नी शालिनी और पुत्र ऐक्ष्वाक के साथ नॉएडा में रहते हैं।

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