सागर, मध्य प्रदेश में जन्मे, यूनिवर्सिटी आफ सागर, जो अब हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, से प्योर और अप्लाइड मैथमेटिक्स और फिजिक्स विषय लेकर वर्ष 1953 में बी.एससी. की परीक्षा मेरिट में उत्तीर्ण करने के पश्चात सहायक वन संरक्षक के पद के लिए सिलेक्ट होने के उपरांत भारतीय वन महाविद्यालय देहरादून की दो वर्षीय फॉरेस्ट ऑफीसर्स प्रशिक्षण 1954-56 बैच में पूर्ण कर ए.आई.एफ.सी. डिप्लोमा प्राप्त किया। वन विभाग और वानिकी कार्यों से लगभग 37 वर्ष तक जुड़े रहने के उपरांत वर्ष 1991 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक मध्य प्रदेश के पद से सेवानिवृत हुए। प्रधान मुख्य वन संरक्षक मध्य प्रदेश के पद पर रहते हुए, प्रबंध निदेशक मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम के अतिरिक्त प्रभार पर भी रहे। सेवानिवृत्ति की तिथि के पूर्व ही मध्य प्रदेश शासन द्वारा 6 माह की सेवा वृद्धि दी गई। उस समय प्रदेश में केवल एक ही प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यरत थे। शासकीय सेवा अवधि में विभिन्न पदों पर रहते हुए चंद्रपुर(अब महाराष्ट्र), बालाघाट, सिवनी, सीहोर, छिंदवाड़ा, बिलासपुर (अब छत्तीसगढ़), बैतूल, ग्वालियर, सागर, दमोह, जबलपुर, रीवा और भोपाल जिलों के वनों और वानिकी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सीहोर जिले में वर्ष 1959 से 1961 अर्थात 2 वर्षों तक वनों का सर्वेक्षण, डिमार्केशन और क्षेत्र वर्क कर आगामी 10 वर्षों के लिए क्रियान्वयन हेतु कार्य योजना प्रस्तुत की। इसी तरह ग्वालियर फॉरेस्ट डिविजन जिसमें ग्वालियर, दतिया और भिंड जिले के वन क्षेत्र सम्मिलित थे में वर्ष 1972 से 1975 अर्थात 3 वर्षों तक वनों का सर्वेक्षण डिमार्केशन और क्षेत्र वर्क कर अगले 15 वर्षों में कार्य करने के लिए कार्य योजना प्रस्तुत किया जो मध्य प्रदेश शासन वन विभाग द्वारा दिनांक 8 अगस्त 1975 को अनुमोदित किया गया। वानिकी क्षेत्र से जुड़े कई विषयों पर रिपोर्ट्स और लेख प्रस्तुत किये। वन विभाग द्वारा संचालित प्रशिक्षण शालाओं के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। टेनिस और ताश का खेल ब्रिज खेलने की हॉबी होने के कारण अरेरा क्लब भोपाल के इंटर और इंट्रा क्लब ब्रिज टूर्नामेंट की कई स्पर्धांओं में पुरस्कार प्राप्त किये। सेवानिवृत्ति उपरांत मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ के संचालक मंडल में सेवाएं देने के साथ ही सेंट्रल और ऑल इंडिया सर्विसेज पेंशनर्स एसोसिएशन भोपाल में उपाध्यक्ष और सी.जी.एच.एस. एडवाइजरी कमेटी में लगभग 4 वर्षों तक कार्यरत रहे। इसी तरह एम.पी. कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की एग्जीक्यूटिव कमेटी और अरेरा क्लब की डिसीप्लिनरी कमेटी में रहते हुए आवश्यक योगदान दिया।
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