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Abhishekanand Tripathi

Language
Hindi
Theme and Category
Poetry
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1 Published
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Paperback
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भारतीय थलसेना में सेवारत अभिषेकानंद त्रिपाठी कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करते रहे हैं। बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में 17 अगस्त 1992 को जन्मे अभिषेकानंद की साहित्यिक अभिरुचि पिता के सान्निध्य और सरस्वती विद्या मंदिर के आचार्यों के बीच रहते हुए उत्पन्न हुई। प्रारंभ से ही भारत माता के प्रति समर्पण की भावना ने उन्हें प्रेरित किया। पुष्पांजलि से आगे बढ़कर रक्तांजलि देने का संकल्प लेते हुए उन्होंने 'NDA' एवं 'IMA' से प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्ष 2013 में कमीशन प्राप्त किया। देशभक्ति, सैन्य-भाव और राष्ट्र पुनर्जागरण की भावनाओं से ओत-प्रोत इनकी कविताएँ साहत्यिक दृष्टि से भी लालित्यपूर्ण हैं। भारतीय मूल्यों और भारत माँ के प्रति चेतना जगाने वाली इनकी कविताएँ लघुकाय और सारगर्भित हैं। मंचीय प्रसिद्धि से दूर और लेखन के अपने प्रारंभिक दौर से गुजरते अभिषेकानंद की कविताएँ बंद कमल के भीतर छुपी सुगन्धि की तरह है जो उषा की राह देख रही है। सैन्य जीवन की व्यस्तता के बीच उनकी लेखनी एक दिन पाठकों और श्रोताओं के हृदय पर एक लीक छोड़ जाएगी।

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भारतीय थलसेना में सेवारत अभिषेकानंद त्रिपाठी कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करते रहे हैं। बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में 17 अगस्त 1992 को जन्मे अभिषेकानंद की साहित्यिक अभिरुचि पिता के सान्निध्य और सरस्वती विद्या मंदिर के आचार्यों के बीच रहते हुए उत्पन्न हुई। प्रारंभ से ही भारत माता के प्रति समर्पण की भावना ने उन्हें प्रेरित किया। पुष्पांजलि से आगे बढ़कर रक्तांजलि देने का संकल्प लेते हुए उन्होंने 'NDA' एवं 'IMA' से प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्ष 2013 में कमीशन प्राप्त किया। देशभक्ति, सैन्य-भाव और राष्ट्र पुनर्जागरण की भावनाओं से ओत-प्रोत इनकी कविताएँ साहत्यिक दृष्टि से भी लालित्यपूर्ण हैं। भारतीय मूल्यों और भारत माँ के प्रति चेतना जगाने वाली इनकी कविताएँ लघुकाय और सारगर्भित हैं। मंचीय प्रसिद्धि से दूर और लेखन के अपने प्रारंभिक दौर से गुजरते अभिषेकानंद की कविताएँ बंद कमल के भीतर छुपी सुगन्धि की तरह है जो उषा की राह देख रही है। सैन्य जीवन की व्यस्तता के बीच उनकी लेखनी एक दिन पाठकों और श्रोताओं के हृदय पर एक लीक छोड़ जाएगी।

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